हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
येन॑ सो॒मादि॑तिः प॒था मि॒त्रा वा॒ यन्त्य॒द्रुहः॑ । तेना॒ नोऽव॒सा ग॑हि ॥ (१)
हे सोम! जिस मार्ग से, अदिति मित्र एवं उस के बारह पुत्र अनुग्रह करते हुए सरंचना करते हैं, उसी मार्ग से हमारा कल्याण करते हुए आओ. (१)
O Mon! Come to the same path as Aditi friends and her twelve sons do charity with grace, doing our welfare. (1)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
येन॑ सोम साह॒न्त्यासु॑रान्र॒न्धया॑सि नः । तेना॑ नो॒ अधि॑ वोचत ॥ (२)
हे सोम! जिस बल के द्वारा तुम हमारे शक्तिशाली शत्रुओं का विनाश करते हो, उसी शक्ति के द्वारा हमें आशीर्वाद वचन सुनाओ. (२)
O Mon! With the force by which you destroy our powerful enemies, tell us the word blessing. (2)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
येन॑ देवा॒ असु॑राणा॒मोजां॒स्यवृ॑णीध्वम् । तेना॑ नः॒ शर्म॑ यच्छत ॥ (३)
हे देवो! तुम अपने जिस बल से शत्रुओं की शक्ति अपने में मिला लेते हो, उसी बल के द्वारा हमारे लिए सुख प्रदान करो. (३)
O God! Provide happiness for us with the same force with which you combine the power of enemies with you. (3)