हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.72.1

कांड 6 → सूक्त 72 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 72
यथा॑सि॒तः प्र॒थय॑ते॒ वशाँ॒ अनु॒ वपूं॑षि कृ॒ण्वन्नसु॑रस्य मा॒यया॑ । ए॒वा ते॒ शेपः॒ सह॑सा॒यम॒र्कोऽङ्गे॒नाङ्गं॒ संस॑मकं कृणोतु ॥ (१)
जैसे बंधा हुआ पुरुष अपने वशवर्ती पुरुषों को लक्षित कर के आसुरी माया के द्वारा अपने शरीरों को प्रसारित करता है, उसी प्रकार अकौआ के वृक्ष से बनी यह ओषधि अर्थात्‌ अर्कमणि तेरे प्रजनन अंग को स्त्री के उपभोग के योग्य बनाए. (१)
Just as a tied man targets his subdued men and transmits his bodies through devilish maya, in the same way, this medicine made from the tree of Akaua i.e. Arkmani makes your reproductive organ eligible for the consumption of the woman. (1)