हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.71.3

कांड 6 → सूक्त 71 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 71
यदन्न॒मद्म्यनृ॑तेन देवा दा॒स्यन्नदा॑स्यन्नु॒त सं॑गृ॒णामि॑ । वै॑श्वान॒रस्य॑ मह॒तो म॑हि॒म्ना शि॒वं मह्यं॒ मधु॑मद॒स्त्वन्न॑म् ॥ (३)
हे देवो! असत्य भाषण के द्वारा दूसरों का जो अन्न अपहरण कर के मैं खाता हूं, उसे मैं अन्न के मालिक को चाहे देता रहा हूं अथवा नहीं देता रहा हूं, पर मैं उसे देने की प्रतिज्ञा करता हूं. वैश्वानर देव की अत्यधिक महिमा से वह अन्न मेरे लिए सुखकर और मधुर हो. (३)
O God! I may or may not have been giving the food that I have been giving to the owner of the food, but I promise to give it to him. May that food be happy and sweet for me with the immense glory of Vaishvanar Dev. (3)