अथर्ववेद (कांड 6)
य उ॒दान॑ट् प॒राय॑णं॒ य उ॒दान॒ण्न्याय॑नम् । आ॒वर्त॑नं नि॒वर्त॑नं॒ यो गो॒पा अपि॒ तं हु॑वे ॥ (२)
मैं उस देवता का आह्वान करता हूं, जो पीछे गमन करने वालों में व्याप्त है. जो नीचे गमन करने वालों में व्याप्त है और जो भागने वालों के लौटने की गति को रोकता है. (२)
I invoke the deity who pervades those who go back. Which is prevalent among those who go down and which prevents the speed of return of those who escape. (2)