अथर्ववेद (कांड 6)
त्वष्टा॑ जा॒याम॑जनय॒त्त्वष्टा॑स्यै॒ त्वां पति॑म् । त्वष्टा॑ स॒हस्र॒मायुं॑षि दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु वाम् ॥ (३)
हे वर! त्वष्टा देव ने स्त्री को जन्म दिया एवं त्वष्टा ने ही तुम्हें इस स्त्री का पति बनाया है. त्वष्टा देव तुम दोनों अर्थात् पतिपत्नी की हजार वर्षो की दीर्घ आयु प्रदान करें. (३)
Hey on! Tvashta Dev gave birth to a woman and Tvashta has made you the husband of this woman. May Tvashta Dev give a long life of thousands of years to both of you i.e. husband and wife. (3)