हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.80.2

कांड 6 → सूक्त 80 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 80
ये त्रयः॑ कालका॒ञ्जा दि॒वि दे॒वा इ॑व श्रि॒ताः । तान्सर्वा॑नह्व ऊ॒तये॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये ॥ (२)
कालकांज नाम के जो तीन असुर उत्तम कमो के कारण देवों के समान स्वर्ग में वर्तमान हैं, मैं इस पुरुष की रक्षा के लिए तथा कौए, कबूतर आदि पक्षियों के आघात संबंधी दोष की भीति के निमित्त सभी कालकांज असुरों का आह्वान करता हूं. (२)
The three asuras named Kalkanj, who are present in heaven like gods due to the best of their best, I call upon all the Kalakanj Asuras to protect this man and to fear the trauma defects of crows, pigeons etc. birds. (2)