हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.81.3

कांड 6 → सूक्त 81 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 81
यं प॑रिह॒स्तमबि॑भ॒रदि॑तिः पुत्रका॒म्या । त्वष्टा॒ तम॑स्या॒ आ ब॑ध्ना॒द्यथा॑ पु॒त्रं जना॑दिति॑ ॥ (३)
पुत्र की इच्छा से देवता अदिति ने जिस कंकण को धारण किया, वही कंकण त्वष्टा देव मेरी इस पत्नी के हाथ में बांधें, जिस से यह पुत्र को जन्म दे सके. (३)
With the desire of the son, the kankan that the god Aditi wore, the same Kankan Tvashta Dev should tie it in the hand of this wife of mine, so that she can give birth to a son. (3)