अथर्ववेद (कांड 6)
अप॑चितः॒ प्र प॑तत सुप॒र्णो व॑स॒तेरि॑व । सूर्यः॑ कृ॒णोतु॑ भेष॒जं च॒न्द्रमा॒ वोऽपो॑च्छतु ॥ (१)
हे गंडमालाओ! जिस प्रकार बाज पक्षी अपने निवास स्थान से उड़ता है, उसी प्रकार तुम मेरे शरीर से निकल जाओ. सूर्य मेरी चिकित्सा करें और चंद्रमा मेरे शरीर से तुम्हें दूर करें. (१)
O gandmalao! Just as the eagle bird flies from its habitat, so you get out of my body. May the sun heal me and the moon remove you from my body. (1)