हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.83.2

कांड 6 → सूक्त 83 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 83
एन्येका॒ श्येन्येका॑ कृ॒ष्णैका॒ रोहि॑णी॒ द्वे । सर्वा॑सा॒मग्र॑भं॒ नामावी॑रघ्नी॒रपे॑तन ॥ (२)
एक गंडमाला लाल रंग की, दूसरी श्वेत वर्ण की तथा तीसरी काले रंग की है. इन के अतिरिक्त दो गंडमालाएं लाल रंग की हैं. मैं इन सब को प्रसन्न करने वाले नाम का उच्चारण करता हूं. इस से प्रसन्न हो कर तुम इस पुरुष को त्याग कर अन्यत्र चली जाओ. (२)
One goiter is red in colour, the other is white in colour and the third is black. Apart from these, two goiter are red in color. I pronounce a name that pleases all this. Pleased with this, you leave this man and go elsewhere. (2)