हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.83.4

कांड 6 → सूक्त 83 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 83
वी॒हि स्वामाहु॑तिं जुषा॒णो मन॑सा॒ स्वाहा॒ मन॑सा॒ यदि॒दं जु॒होमि॑ ॥ (४)
हे घाव रोग के अभिमानी देव! तुम अपनी आहुति का भक्षण करो. सेवा किए जाते हुए तुम आहुति का भक्षण करो. मैं भी मन से यह हवि देता हूं. (४)
O arrogant God of wound disease! You eat your sacrifice. While serving, you should eat sacrifice. I also give this havi with my heart. (4)