अथर्ववेद (कांड 6)
स॑मु॒द्र ई॑शे स्र॒वता॑म॒ग्निः पृ॑थि॒व्या व॒शी । च॒न्द्रमा॒ नक्ष॑त्राणामीशे॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व ॥ (२)
सागर बहने वाले जलों का स्वामी है. अग्नि देव पृथ्वी के स्वामी हैं. चंद्रमा नक्षत्रों का स्वामी है. तुम सभी प्राणियों में श्रेष्ठ बनो. (२)
The ocean is the swami of the flowing waters. Agni Dev is the swami of the earth. Moon is the swami of constellations. You be the best of all beings. (2)