हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.88.2

कांड 6 → सूक्त 88 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
ध्रु॒वं ते॒ राजा॒ वरु॑णो ध्रु॒वम्दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ । ध्रु॒वं त॒ इन्द्र॒श्चाग्निश्च॑ रा॒ष्ट्रं धा॑रयतां ध्रु॒वम् ॥ (२)
हे राजन्‌! राजा वरुण तुम्हारे राज्य को स्थिर करें. प्रकाश करते हुए बृहस्पति तुम्हारे राष्ट्र को ध्रुव बनाएं. इंद्र और अनिने तुम्हारे राष्ट्र को स्थिर बनाएं. (२)
O king! May King Varuna stabilize your kingdom. While lighting, Jupiter should make your nation pole. May Indra and Anine make your nation stable. (2)