हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.90.1

कांड 6 → सूक्त 90 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 90
यां ते॑ रु॒द्र इषु॒मास्य॒दङ्गे॑भ्यो॒ हृद॑याय च । इ॒दं ताम॒द्य त्वद्व॒यं विषू॑चीं॒ वि वृ॑हामसि ॥ (१)
हे रोगी! तेरे हाथ, पैर और हृदय आदि अंगों को बेधने के लिए रुद्र देव ने जो बाण अपने धनुष पर चढ़ा कर फेंका है, आज मैं उस का प्रतिकार करने के लिए उस बाण को तुझ से विमुख करने के लिए शरीर से दूर फेंकता हूं. (१)
O patient! Today, to resist the arrow that Rudra Dev has thrown on his bow to pierce your hands, feet and heart, today I throw that arrow away from the body to turn it away from you. (1)