हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 93
य॒मो मृ॒त्युर॑घमा॒रो नि॑रृ॒थो ब॒भ्रुः श॒र्वोऽस्ता॒ नील॑शिखण्डः । दे॑वज॒नाः सेन॑योत्तस्थि॒वांस॒स्ते अ॒स्माकं॒ परि॑ वृञ्जन्तु वी॒रान् ॥ (१)
पापियों की हिंसा के लिए यम, मृत्यु, अघमार, निर्त्रति, बश्चु, शर्व एवं नीलशिखंड आदि देवगण, अपने परिवार जनों के साथ अपनेअपने स्थान से चल दिए हैं. वे हमारे पुत्र, पौत्र आदि को छोड़ दें. (१)
For the violence of sinners, devas like Yama, Death, Aghamar, Nirtriti, Bashchu, Sharva and Neelshikhand etc. have left their place with their family members. They should leave our sons, grandsons etc. (1)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 93
मन॑सा॒ होमै॒र्हर॑सा घृ॒तेन॑ श॒र्वायास्त्र॑ उ॒त राज्ञे॑ भ॒वाय॑ । न॑म॒स्येभ्यो॒ नम॑ एभ्यः कृणोम्य॒न्यत्रा॒स्मद॒घवि॑षा नयन्तु ॥ (२)
शर्व के लिए, क्षेत्र के लिए एवं उन सब के स्वामी महादेव के लिए मैं मन से, तेज से, घृत और आज्यों से नमस्कार करता हूं. ये सभी नमस्कार के योग्य हैं. प्रसन्न हो कर ये पाप रूपी विष से पूर्ण कृत्याओं को हम से दूर ले जाएं. (२)
For sharva, for the region and for Mahadev, the swami of all of them, I greet with heart, with glory, with ghee and ajyas. All of them deserve salutations. Please be happy and take these sin-filled acts away from us. (2)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 93
त्राय॑ध्वं नो अ॒घवि॑षाभ्यो व॒धाद्विश्वे॑ देवा मरुतो विश्ववेदसः । अ॒ग्नीषोमा॒ वरु॑णः पू॒तद॑क्षा वातापर्ज॒न्ययोः॑ सुम॒तौ स्या॑म ॥ (३)
हे सब कुछ जानने वाले मरुदगण एवं विश्वे देव! तुम कृत्याओं की मारक शक्ति से हमारी रक्षा करो. हम अग्नि, सोम, वरुण, शुद्ध बलशाली मित्र, वायु एवं पर्जन्य के कृपा पात्र रहें. (३)
O God of God who knows everything! Protect us from the agnipower of actions. May we be blessed by Agni, Soma, Varuna, pure strong friends, Vayu and Parjanya. (3)