हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.95.1

कांड 6 → सूक्त 95 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 95
अ॑श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि । तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत ॥ (१)
तीसरे आकाश में देवों का स्थान पीपल है. वहां देवों ने अमृत के गुण वाले वनस्पति कूठ को जाना. (१)
In the third sky, the place of gods is Peepal. There the gods came to know the vegetable kutha with the quality of nectar. (1)