अथर्ववेद (कांड 7)
को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन् । को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑ ॥ (१)
हमें निवास स्थान देने का इच्छुक कौन क्षत्रिय राजा इस समय बाधा पहुंचाने वाली एवं अहितकारिणी पिशाची से हमारा उद्धार करेगा? हमारे द्वारा किए जाते हुए यज्ञ की कामना करता हुआ एवं हमें धन की आपूर्ति की इच्छा करता हुआ कौन सा देव देवों के मध्य चिरकाल तक होने वाले जीवन को प्राप्त करता है. (१)
Which Kshatriya king, willing to give us a place of residence, will save us from the obstructionist and harmful vampire at this time? Wishing for the yajna performed by us and wishing to supply us money, which god gets the life that takes place forever among the gods? (1)