हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.109.1

कांड 7 → सूक्त 109 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 109
कः पृश्निं॑ धे॒नुं वरु॑णेन द॒त्तामथ॑र्वणे सु॒दुघां॒ नित्य॑वत्साम् । बृह॒स्पति॑ना स॒ख्यं जुषा॒णो य॑थाव॒शं त॒न्वः कल्पयाति ॥ (१)
लाल आदि रंगों वाली, सरलता से दुही जाने वाली, सर्वदा बछड़े देने वाली एवं अथर्वा ऋषि के लिए वरुण द्वारा दी गई गाय को बृहस्पति देव के साथ मित्रता का भाव रखता हुआ कोन सा देव इच्छानुसार कल्पित कर सकता है. आशय यह है कि केवल बृहस्पति देव ही ऐसा कर सकते हैं. (१)
A cow with red etc. colors, easy to milk, always giving calves and given by Varuna for Atharva Rishi, can be imagined by a god with a sense of friendship with Jupiter Dev. The intention is that only Jupiter can do this. (1)