अथर्ववेद (कांड 7)
संव॑सव॒ इति॑ वो नाम॒धेय॑मुग्रंप॒श्या रा॑ष्ट्र॒भृतो॒ ह्यक्षाः । तेभ्यो॑ व इन्दवो ह॒विषा॑ विधेम व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (६)
हे गंधर्वो अर्थात् जुए के पासो! तुम वसु अर्थात् धन प्राप्त कराते हो, इसलिए तुम्हारा नाम संवसु है. क्योंकि पासे उग्रंपश्या राष्ट्रभृत नामक दो अप्सराओं से संबंधित हैं, इसलिए हम उन गंधर्वो अथवा पासों के लिए सोमयुक्त हवि प्रयुक्त करते हैं. इस के पश्चात जुआ खेलते हुए हम धनों के स्वामी बनें. (६)
O Gandharvo, that is, the dice of gambling! You get Vasu i.e. wealth, so your name is Samvasu. Since the dice are related to two nymphs called Ugrampshya Rashtrabhrita, we use somyukta havi for those Gandharvas or dice. After this, while gambling, we become the masters of wealth. (6)