हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 121
नमो॑ रू॒राय॒ च्यव॑नाय॒ नोद॑नाय धृ॒ष्णवे॑ । नमः॑ शी॒ताय॑ पूर्वकाम॒कृत्व॑ने ॥ (१)
शरीर का पसीना गिराने वाले, प्रेरक एवं सहन करने वाले, उष्णिक्‌ ज्वर से संबंधित देव को नमस्कार है. अभिलाषाओं का विनाश करने वाले शीत ज्वर से संबंधित देव को नमस्कार है. (१)
Salutations to the god who makes the body sweat, motivator and tolerates, related to thermal fever. Salutations to the god related to cold fever, which destroys desires. (1)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 121
यो अ॑न्ये॒द्युरु॑भय॒द्युर॒भ्येती॒मं म॒ण्डूक॑म॒भ्येत्वव्र॒तः ॥ (२)
जो ज्वर दूसरे अथवा चौथे दिन आता है, वह नियमहीन ज्वर मेढक के पास चला जाए. (२)
The fever that comes on the second or fourth day should go to the regular fever frog. (2)