हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.15.3

कांड 7 → सूक्त 15 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
सावी॒र्हि दे॑व प्रथ॒माय॑ पि॒त्रे व॒र्ष्माण॑मस्मै वरि॒माण॑मस्मै । अथा॒स्मभ्यं॑ सवित॒र्वार्या॑णि दि॒वोदि॑व॒ आ सु॑वा॒ भूरि॑ प॒श्वः ॥ (३)
हे सविता देव! इस प्रमुख एवं पुष्टि की कामना करने वाले यजमान को पुत्र, पौत्र आदि संतान की प्रेरणा दो. इस पुष्टि चाहने वाले यजमान को उत्तमता प्रदान करो. हे सविता देव! इस के पश्चात हमारे लिए प्रतिदिन वरण करने योग्य फल एवं अधिक मात्रा में पशु प्रदान करो. (३)
O Savita Dev! Inspire the host who wishes for this major and confirmation to have children like son, grandson etc. Give excellence to the host seeking this confirmation. O Savita Dev! After this, provide us with selectable fruits and more animals every day. (3)