हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.27.6

कांड 7 → सूक्त 27 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
विष्णोः॒ कर्मा॑णि पश्यत॒ यतो॑ व्र॒तानि॑ पस्प॒शे । इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑ ॥ (६)
व्यापक विष्णु देव के उत्तम स्थान को मेधावी लोग देखते हैं. उन का स्थान आकाश में सूर्य मंडल के समान विस्तृत है. (६)
Meritorious people see the excellent place of the widespread Vishnu Dev. Their location in the sky is as wide as the solar system. (6)