हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.27.5

कांड 7 → सूक्त 27 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
त्रीणि॑ प॒दा वि च॑क्रमे॒ विष्णु॑र्गो॒पा अदा॑भ्यः । इ॒तो धर्मा॑णि धा॒रय॑न् ॥ (५)
हे स्तोताओ! सर्व व्यापक विष्णु देव के उन कर्मो को देखो, जिन कर्मो के द्वारा उन्होंने तुम्हारे कों का स्पर्श किया. ये विष्णु इंद्र देव के योग्य सखा हैं. (५)
O stotao! Look at the deeds of the all-pervasive Vishnu God, through which he touched you. This Vishnu is a worthy sakha of Indra Dev. (5)