हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.27.8

कांड 7 → सूक्त 27 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
दि॒वो वि॑ष्ण उ॒त वा॑ पृ॑थि॒व्या म॒हो वि॑ष्ण उ॒रोर॒न्तरि॑क्षात् । हस्तौ॑ पृणस्व ब॒हुभि॑र्वस॒व्यैरा॒प्रय॑च्छ॒ दक्षि॑णा॒दोत स॒व्यात् ॥ (८)
हे विष्णु देव! आप अपने दोनों हाथों के द्वारा ्ुलोक, भूलोक और अंतरिक्ष लोक से हमें बहुत से साधन प्रदान करो. (८)
O God of Vishnu! You provide us with many means from the world, the earth and the space world through both your hands. (8)