हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.39.4

कांड 7 → सूक्त 39 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 39
अ॒हं व॑दामि॒ नेत्त्वं स॒भाया॒मह॒ त्वं वद॑ । ममेदस॒स्त्वं केव॑लो॒ नान्यासां॑ की॒र्तया॑श्च॒न ॥ (४)
पति के वशीकरण के लिए जड़ीबूटी पा कर नारी अपने पति से कहती है—हे पति! आओ. अब मैं ही बोलूंगी. तुम कभी मत बोलना. तुम केवल विद्वानों की सभा में बोलना. हे पति! तुम केवल मेरे ही रहोगे, अन्य नारियों के नहीं. (४)
After getting herbs for the husband's vashikaran, the woman says to her husband- O husband! Come. Now I will speak. You never speak. You speak only at the gathering of scholars. O husband! You will only be mine, not other women. (4)