अथर्ववेद (कांड 7)
सोमा॑रुद्रा यु॒वमे॒तान्य॒स्मद्विश्वा॑ त॒नूषु॑ भेष॒जानि॑ धत्तम् । अव॑ स्यतं मु॒ञ्चतं॒ यन्नो॒ अस॑त्त॒नूषु॑ ब॒द्धं कृ॒तमेनो॑ अ॒स्मत् ॥ (२)
हे सोम एवं रुद्र देव! तुम दोनों हमारे शरीरों में रोगों को निकालने वाली जड़ीबूटियों को स्थापित करो. हमारे शरीरों में स्थित हमारे द्वारा किया हुआ जो पाप है, उसे भी हम से अलग करो और नष्ट कर दो. (२)
O Soma and Rudra Dev! Both of you install herbs that remove diseases in our bodies. Separate and destroy the sin committed by us in our bodies. (2)