हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.43.1

कांड 7 → सूक्त 43 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 43
सोमा॑रुद्रा॒ वि वृ॑हतं विषूची॒ममी॑वा॒ या नो॒ गय॑मावि॒वेश॑ । बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत् ॥ (१)
हे सोम एवं रुद्र देव! सभी ओर फैलने वाले उस अमीवा नामक रोग का विनाश करो जो हमारे शरीर में प्रवेश कर गया है. इस के अतिरिक्त अमीवा रोग का कारण बनी हुई पिशाची को विमुख कर के दूर ले जाओ, जिस से वह हमारे पास न आ सके. हमारे द्वारा किए हुए पाप को भी हम से दूर करो. (१)
O Soma and Rudra Dev! Destroy the disease called Amiva spreading all over which has entered our body. In addition to this, turn away the vampire that is the cause of Amiva disease and take it away, so that it can not come to us. Remove the sins committed by us from us. (1)