हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.48.3

कांड 7 → सूक्त 48 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 48
या वि॒श्पत्नीन्द्र॒मसि॑ प्र॒तीची॑ स॒हस्र॑स्तुकाभि॒यन्ती॑ दे॒वी। विष्णोः॑ पत्नि॒ तुभ्यं॑ रा॒ता ह॒वींषि॒ पतिं॑ देवि॒ राध॑से चोदयस्व ॥ (३)
जो सिनीवाली प्रजाओं का पालन करने वाली तथा परमैश्वर्य संपन्न इंद्र के सामने खड़ी होने वाली है तथा हजारों स्तोताओं द्वारा प्रशंसित एवं प्रकाशित होने वाली है. हे विष्णु अथवा इंद्र की पत्नी! तेरे लिए हवि दी गई है. हे देवी! तू प्रसन्न हो कर अपने पति इंद्र को हमें धन देने के लिए प्रेरित कर. (३)
Which is going to stand in front of Indra, who follows the siniwali subjects and is going to be admired and illuminated by thousands of psalms. O wife of Vishnu or Indra! It has been given to you. O Goddess! Please encourage your husband Indra to give us money. (3)