हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.49.1

कांड 7 → सूक्त 49 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 49
कु॒हूं दे॒वीं सु॒कृतं॑ विद्म॒नाप॑सम॒स्मिन्य॒ज्ञे सु॒हवा॑ जोहवीमि । सा नो॑ र॒यिं वि॒श्ववा॑रं॒ नि य॑च्छा॒द्ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्यम् ॥ (१)
कुहू अथवा चंद्रमा दिखाई न देने वाली अमावस्या देवी को मैं इस यज्ञ में बुलाता हूं अथवा हवि से होम करता हूं. शोभन कर्म करने वाली, विदित कर्मो वाली एवं शोभन आह्वान वाली वह अमावस्या हमें सब के द्वारा वरणीय धन दे तथा अधिक धन देने वाला, प्रशंसनीय एवं वीर पुत्र प्रदान करे. (१)
I call the New Moon Goddess, who is not seen in Kuhu or moon, in this yagna or do homa with havi. May that Amavasya, which performs shoban karma, known deeds and invocation of shobhan, gives us various wealth through all and gives us a more wealthy, praiseworthy and brave son. (1)