हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.52.4

कांड 7 → सूक्त 52 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 52
व॒यं ज॑येम॒ त्वया॑ यु॒जा वृत॑म॒स्माक॒मंश॒मुद॑वा॒ भरे॑भरे । अ॒स्मभ्य॑मिन्द्र॒ वरी॑यः सु॒गं कृ॑धि॒ प्र शत्रू॑णां मघव॒न्वृष्ण्या॑ रुज ॥ (४)
हे इंद्र! तुम्हारी सहायता से हम अपने विरोधी जुआरी को जीत लें. तुम प्रत्येक दूत क्रीड़ा में हम जीत के इच्छुकों का अंश सुरक्षित करो. इस के अतिरिक्त तुम हमें अत्यधिक धन प्राप्त कराओ. हे धनवान इंद्र! तुम मेरे विरोधी जुआरियों को जीतने की शक्ति को समाप्त कर दो. (४)
O Indra! With your help, let us conquer our opponent gamblers. You secure the fraction of each messenger we desire to win in sports. In addition to this, you get us a lot of money. O rich Indra! You eliminate the power to conquer my anti-jurors. (4)