हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.57.1

कांड 7 → सूक्त 57 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 57
ऋचं॒ साम॒ यदप्रा॑क्षं ह॒विरोजो॒ यजु॒र्बल॑म् । ए॒ष मा॒ तस्मा॒न्मा हिं॑सी॒द्वेदः॑ पृ॒ष्टः श॑चीपते ॥ (१)
हम ऋग्वेद और सामवेद को हवि के द्वारा पूजते हैं. यजमान ऋग्वेद और सामवेद के द्वारा यज्ञ कर्म करते हैं. ये दोनों वेद सदस नामक मंडप में शोभा देते हैं तथा यज्ञ को देवों तक पहुंचाते हैं. (१)
We worship rigveda and samaveda through havi. The host performs yajna karma through Rigveda and Samaveda. Both of these Vedas adorn the pavilion called Sadas and convey the yajna to the gods. (1)