हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.58.2

कांड 7 → सूक्त 58 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 58
इ॒यं वी॒रुन्मधु॑जाता मधु॒श्चुन्म॑धु॒ला म॒धूः । सा विह्रु॑तस्य भेष॒ज्यथो॑ मशक॒जम्भ॑नी ॥ (२)
यह प्रयोग की जाती हुई ओषधि मधु अर्थात्‌ शहद से निर्मित है, इसलिए इस से शहद टपकता है. मधु युक्त तथा मधूक नाम वाली यह जड़ीबूटी कुटिलता करने वाले विष का नाश करने वाली तथा मच्छरों को समाप्त करने वाली है. (२)
This used medicine is made from honey, so honey drips from it. This herb, containing honey and named Madhuk, destroys the poison of crooked poison and eliminates mosquitoes. (2)