हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.58.5

कांड 7 → सूक्त 58 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 58
अ॑र॒सस्य॑ श॒र्कोट॑स्य नी॒चीन॑स्योप॒सर्प॑तः । वि॒षं ह्यस्यादि॒ष्यथो॑ एनमजीजभम् ॥ (५)
विष रहित, नीचे की ओर मुंह किए हुए एवं तेरे समीप आते हुए शर्कोटक नाम के सांप के मैं ने टुकड़े कर दिए हैं अर्थात्‌ मैं ने इस का विष समाप्त कर दिया है तथा इस सर्प को मैं ने नष्ट कर दिया है. (५)
Without poison, facing down and approaching you, I have cut the snake named Sharkotak into pieces, that is, I have eliminated its poison and I have destroyed this snake. (5)