हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.63.1

कांड 7 → सूक्त 63 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 63
यद॑ग्ने॒ तप॑सा॒ तप॑ उपत॒प्याम॑हे॒ तपः॑। प्रि॒याः श्रु॒तस्य॑ भूया॒स्मायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑ ॥ (१)
हे अग्नि देव! तुम्हारे समीप समिदाधान आदि रूप कर्म के द्वारा जो तप किया जा सकता है, वह तप हम करते हैं. उस तप के द्वारा हम अध्ययन किए हुए वेदमंत्रों के प्रिय, अधिक आयु वाले और उत्तम धारण शक्ति से संपन्न बनें. (१)
O God of Agni! We do the penance that can be done near you through the form of samadhidhan etc. Through that penance, we become dear, old and endowed with the best holding power of the veda mantras studied. (1)