अथर्ववेद (कांड 7)
अग्ने॒ तप॑स्तप्यामह॒ उप॑ तप्यामहे॒ तपः॑ । श्रु॒तानि॑ शृ॒ण्वन्तो॑ व॒यमायु॑ष्मन्तः सुमे॒धसः॑ ॥ (२)
हे अग्नि देव! तुम्हारे समीप ही हम शरीर को सुखाने वाला तप करें. हम इस का तप किसी दूसरे स्थान पर न करें. हम अध्ययन किए गए वेदमंत्रों को सुनते हुए अधिक आयु वाले और उत्तम बुद्धि वाले बनें. (२)
O God of Agni! Near you, let us do penance that dries the body. We should not do this in any other place. Let us be older and have a better intellect by listening to the Veda mantras studied. (2)