हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.77.9

कांड 7 → सूक्त 77 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 77
जुष्टो॒ दमू॑ना॒ अति॑थिर्दुरो॒ण इ॒मं नो॑ य॒ज्ञमुप॑ याहि वि॒द्वान् । विश्वा॑ अग्ने अभि॒युजो॑ वि॒हत्य॑ शत्रूय॒तामा भ॑रा॒ भोज॑नानि ॥ (९)
हे अग्नि! सब के द्वारा सेवित एवं प्रसन्न मन वाला अतिथि सभी यजमानों के घरों में आए तथा तुम्हारे विषय में मेरी भक्ति को जाने. हे अग्नि! तुम मुझ पर आक्रमण करने वाली शत्रु सेनाओं को त्याग कर मेरे शन्रुओं का भोजन मेरे लिए लाओ. (९)
O agni! A guest served by all and happy-minded guests came to the houses of all the hosts and learned my devotion to you. O agni! You give up the enemy armies that attacked me and bring me the food of my princes. (9)