हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.82.2

कांड 7 → सूक्त 82 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 82
यो नो॒ मर्तो॑ मरुतो दुर्हृणा॒युस्ति॒रश्चि॒त्तानि॑ वसवो॒ जिघां॑सति । द्रु॒हः पाशा॒न्प्रति॑ मुञ्चतां॒ स तपि॑ष्ठेन॒ तप॑सा हन्तना॒ तम् ॥ (२)
हे धन देने वाले मरुतो! जो दुष्ट मनुष्य हम से छिप कर हमारे मन को क्षुब्ध करता है, वह शत्रु पापियों से द्रोह करने वाले वरुण के पाशों को धारण करे. हे मरुतो! हमें मारने की इच्छा करने वाले मनुष्य को अपने आयुध से मार डालो. (२)
O Richter! The evil man who hides from us and disturbs our mind, he should wear the traps of Varuna, who is hostile to enemy sinners. O Maruto! Kill the man who wants to kill us with your weapon. (2)