हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.84.4

कांड 7 → सूक्त 84 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 84
अमा॑वास्ये॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान । यत्का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (४)
हे अमावस्या! तेरे अतिरिक्त कोई भी देव इस समय वर्तमान समस्त साकार प्राणियों में व्याप्त होने वाला नहीं है. हम जिस फल की कामना करते हुए तुम्हें हवि देते हैं, हमें वह फल प्राप्त हो और हम धनों के स्वामी बनें. (४)
O New Moon! Apart from you, no God is going to pervade all the present beings at this time. May we receive the fruit we desire and become the masters of wealth. (4)