हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.88.1

कांड 7 → सूक्त 88 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 88
अ॒प्सु ते॑ राजन्वरुण गृ॒हो हि॑र॒ण्ययो॑ मि॒थः । ततो॑ धृ॒तव्र॑तो॒ राजा॒ सर्वा॒ धामा॑नि मुञ्चतु ॥ (१)
हे समस्त देवों के स्वामी वरुण! जलों के मध्य तुम्हारा स्वर्ण निर्मित निवास स्थान है, जहां दूसरे नहीं पहुंच सकते. इस कारण सच्चे कर्मो वाले राजा वरुण हमारे शरीर के सभी स्थानों को त्याग दें अर्थात्‌ हमें जलोदर आदि रोग न हो. (१)
O Swami of all gods Varuna! Your golden-made habitat is in the middle of the waters, where others cannot reach. For this reason, King Varuna, who has true deeds, should leave all the places of our body, that is, we do not have diseases like ascites etc. (1)