हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.94.1

कांड 7 → सूक्त 94 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 94
अ॒पो दि॒व्या अ॑चायिषं॒ रसे॑न॒ सम॑पृक्ष्महि । पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा ॥ (१)
मैं दिव्य जलों की पूजा करता हूं. मैं उन जलों के रस से युक्त हो जाऊं. हे अग्नि! मैं तुम्हारे लिए हवि ले कर आया हूं. इस प्रकार के मुझे तुम तेज से युक्त करो. (१)
I worship divine waters. I should be equipped with the juice of those waters. O agni! I have brought you havi for you. Thus let me contain you sharp. (1)