अथर्ववेद (कांड 8)
कृ॒णोमि॑ ते प्राणापा॒नौ ज॒रां मृ॒त्युं दी॒र्घमायुः॑ स्व॒स्ति । वै॑वस्व॒तेन॒ प्रहि॑तान्यमदू॒तांश्च॑र॒तोऽप॑ सेधामि॒ सर्वा॑न् ॥ (११)
हे आयु को चाहने वाले पुरुष! मैं तेरे शरीर में प्राण और अपान वायु को स्थिर करता हूं. मैं ऐसा उपाय करता हूं, जिस से बुढ़ापा और मृत्यु तुझे न छू सकें. मैं तेरी आयु का विस्तार कर के तेरा कल्याण करता हूं तथा यमराज के द्वारा भेजे हुए एवं सभी जगह घूमते हुए यमदूतों को तुझ से दूर करता हूं. (११)
O man who wants age! I stabilize the life and my air in your body. I take such measures that old age and death cannot touch you. I extend your life and do your welfare and remove the Yamdoots sent by Yamraj and roaming everywhere from you. (11)