अथर्ववेद (कांड 8)
या रोह॑न्त्याङ्गिर॒सीः पर्व॑तेषु स॒मेषु॑ च । ता नः॒ पय॑स्वतीः शि॒वा ओष॑धीः सन्तु॒ शं हृ॒दे ॥ (१७)
अंगिरा ऋषि द्वारा बताई गई जो जड़ीबूटियां ऊंचे पर्वतों पर एवं समतल मैदानों में उत्पन्न होती हैं, वे दूध के समान सार वाली जड़ीबूटियां हमारे लिए कल्याणकारिणी हों एवं हमारे हृदयों को शांति प्रदान करें. (१७)
The herbs mentioned by Angira Rishi, which are produced on high mountains and flat plains, should be welfare for us and give peace to our hearts. (17)