हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.7.18

कांड 8 → सूक्त 7 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
याश्चा॒हं वेद॑ वी॒रुधो॒ याश्च॒ पश्या॑मि॒ चक्षु॑षा । अज्ञा॑ता जानी॒मश्च॒ या यासु॑ वि॒द्म च॒ संभृ॑तम् ॥ (१८)
जिन वृक्षों को मैं जानता हूं, जिन को मैं अपनी आंखों से देख सकता हूं और जिन को मैं नहीं जानता, वे सभी रोग विनाश में समर्थ हैं. (१८)
The trees I know, the ones I can see with my own eyes, and the trees I do not know, are all capable of disease destruction. (18)