अथर्ववेद (कांड 9)
यथा॒ मधु॑ मधु॒कृतः॑ सं॒भर॑न्ति॒ मधा॒वधि॑ । ए॒वा मे॑ अश्विना॒ वर्च॑ आ॒त्मनि॑ ध्रियताम् ॥ (१६)
जैसे मधु एकत्र करने वाले मुझ पर मधु गिराते हैं, उसी प्रकार अश्विनीकुमार मुझ में तेज को स्थापित करें. (१६)
Just as the honey collectors drop honey on me, so Ashwinikumar should install tej in me. (16)