हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.1.17

कांड 9 → सूक्त 1 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यथा॒ मक्षा॑ इ॒दं मधु॑ न्य॒ञ्जन्ति॒ मधा॒वधि॑ । ए॒वा मे॑ अश्विना॒ वर्च॒स्तेजो॒ बल॒मोज॑श्च ध्रियताम् ॥ (१७)
जिस प्रकार मधुमक्खियां मधु के ऊपर मधु रखती है, उसी प्रकार अश्विनीकुमार मुझ को वर्चस्वी, तेजस्वी, बली और ओज युक्त बनाएं. (१७)
Just as bees place honey on honey, so Ashwinikumar make me dominated, stunning, strong and energetic. (17)