अथर्ववेद (कांड 9)
स उप॑हूतः पृथि॒व्यां भ॑क्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न्यत्पृ॑थि॒व्यां वि॒श्वरू॑पम् ॥ (७)
वह बुला कर पृथ्वी के समस्त प्राणियों को भोजन कराता है, उस अतिथि सत्कार में मानो विश्वरूप ही बुलाए जाते हैं. (७)
He calls and feeds all the creatures of the earth, in that hospitality, it is as if the world forms are called. (7)