अथर्ववेद (कांड 9)
स उप॑हूतो॒ऽन्तरि॑क्षे भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न्यद॒न्तरि॑क्षे वि॒श्वरू॑पम् ॥ (८)
वह बुलाने पर स्वर्ग में भोजन करता है. अंतरिक्ष में जो विश्वरूप है, वह उस के यहां बुलाया जाता है. (८)
He eats in heaven when called. The world form in space is called to him. (8)