हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.13.1

कांड 9 → सूक्त 13 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
शीर्ष॒क्तिं शी॑र्षाम॒यं क॑र्णशू॒लं वि॑लोहि॒तम् । सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यं ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे ॥ (१)
हम तेरे शीश के रोगों अर्थात्‌ शीर्षोक्ति, शीर्षामय और कर्ण शूल तथा विलोहित को तुझ से दूर करते हैं. (१)
We remove from you the diseases of your head, that is, headlessness, and ear-care and willing. (1)