हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.14.16

कांड 9 → सूक्त 14 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
सा॑कं॒जानां॑ स॒प्तथ॑माहुरेक॒जं षडिद्य॒मा ऋष॑यो देव॒जा इति॑ । तेषा॑मि॒ष्टानि॒ विहि॑तानि धाम॒श स्था॒त्रे रे॑जन्ते॒ विकृ॑तानि रूप॒शः ॥ (१६)
देवों के साथ उत्पन्न ऋषि छः बताए गए हैं. ऋषि और देव बताते हैं कि यह छ: एक से ही उत्पन्न हुए हैं. इस के मनचाहे स्थान निश्चित हैं. ये अनेक प्रकार से विराजमान होते हैं. (१६)
The sages born with the gods are described as six. Rishi and Dev say that these six originated from one. The desired location of this is certain. They sit in many ways. (16)