अथर्ववेद (कांड 9)
यद्गा॑य॒त्रे अधि॑ गाय॒त्रमाहि॑तं॒ त्रैष्टु॑भं वा॒ त्रैष्टु॑भान्नि॒रत॑क्षत। यद्वा॒ जग॒ज्जग॒त्याहि॑तं प॒दं य इत्तद्वि॒दुस्ते अ॑मृत॒त्वमा॑नशुः ॥ (१)
गायत्र में गायत्र छिपा हुआ है और त्रैष्टुभम् में त्रैष्टुभ व्याप्त है. जो लोग जगती में छिपे हुए जगत् को जानते हैं, वे अमृत का उपभोग करते हैं. (१)
Gayatra is hidden in Gayatra and Traishtubh is pervaded in Traishtubham. Those who know the world hidden in the world, they attain eternity. (1)
अथर्ववेद (कांड 9)
गा॑य॒त्रेण॒ प्रति॑ मिमीते अ॒र्कम॒र्केण॒ साम॒ त्रैष्टु॑भेन वा॒कम् । वा॒केन॑ वा॒कं द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा॒क्षरे॑ण मिमते स॒प्त वाणीः॑ ॥ (२)
गायत्र से अर्क अर्थात् सूर्य का निर्माण होता है. अर्क से साम का और त्रैष्टुभ से वाक का निर्माण होता है. वाक् से वाकू को तथा द्विपदा एवं चतुष्पदा तथा अविनाशी ब्रह्म से सप्तवाणी अर्थात् सात प्रकार के वेद के छंद निर्मित होते हैं. (२)
Extract i.e. sun is formed from the cow. Sam is formed from extract and speech is formed from Trishtubh. Speech leads to vaku and dwipada and chatushpada and imperishable Brahma to saptavani i.e. verses of seven types of Vedas are made. (2)
अथर्ववेद (कांड 9)
जग॑ता॒ सिन्धुं॑ दि॒व्यस्कभायद्रथंत॒रे सूर्यं॒ पर्य॑पश्यत् । गा॑य॒त्रस्य॑ स॒मिध॑स्ति॒स्र आ॑हु॒स्ततो॑ म॒ह्ना प्र रि॑रिचे महि॒त्वा ॥ (३)
संसार के द्वारा सिंधु को द्विलोक की ओर प्रेरित किया गया. ज्ञानियों ने रथंतर में सूर्य का दर्शन किया. उन्होंने गायत्र यज्ञ की तीन समिधाएं बताई. इस के पश्चात वे अपनी महत्ता से ही वृद्धि को प्राप्त हुए. (३)
Sindhu was inspired by the world towards Dwilaoka. The wise saw the sun in Rathantar. He told three samidhas of Gayatri Yagya. After this, he got growth from his importance. (3)
अथर्ववेद (कांड 9)
उप॑ ह्वये सु॒दुघां॑ धे॒नुमे॒तां सु॒हस्तो॑ गो॒धुगु॒त दो॑हदेनाम् । श्रेष्ठं॑ स॒वं स॑वि॒ता सा॑विषन्नो॒ऽभीद्धो॑ घ॒र्मस्तदु॒ षु प्र वो॑चत् ॥ (४)
शोभन हाथ से गायों को दोहने वाला मैं सरलता से दुही जाने वाली गाय का दूध दुहता हुआ उसे अपने समीप बुलाता हूं. सविता ने मुझे श्रेष्ठ गौ प्रदान की है. उन्हीं में तेजस्वी धर्म का कथन किया गया है. (४)
Shobhan, who exploits cows by hand, I call him near me, milking the easy-to-milk cow. Savita has given me the best cow. In them, the statement of Tejashwi dharma has been made. (4)
अथर्ववेद (कांड 9)
हि॑ङ्कृण्व॒ती व॑सु॒पत्नी॒ वसू॑नां व॒त्समि॒च्छन्ती॒ मन॑सा॒भ्यागा॑त् । दु॒हाम॒श्विभ्यां॒ पयो॑ अ॒घ्न्येयं सा व॑र्धतां मह॒ते सौभ॑गाय ॥ (५)
हुंकार करती हुई, धन से पालने योग्य एवं बछड़े की इच्छा करती हुई गौ धनवानों के समीप पहुंची. हिंसा न करने योग्य यह गाय अश्चिनीकुमारों के निमित्त दूध देती हुई हमें महान सौभाग्य के लिए प्राप्त हो. (५)
Shouting, raising money and wanting a calf, the cow reached near the rich. May we have great fortune by giving milk for the Ashchinikumaras, a cow that does not commit violence. (5)
अथर्ववेद (कांड 9)
गौर॑मीमेद॒भि व॒त्सं मि॒षन्तं॑ मू॒र्धानं॒ हिङ्ङ॑कृणोन्मात॒वा उ॑ । सृक्वा॑णं घ॒र्मम॒भि वा॑वशा॒ना मिमा॑ति मा॒युं पय॑ते॒ पयो॑भिः ॥ (६)
हुंकार करती हुई गाय उस बछड़े के समीप जा कर उसे सूंघती है जो उस की ओर ताकता है. यह बताने के लिए कि यह बछड़ा मेरा ही है, यह गौ रंभाती है और अपने दूध से उसे बढ़ाती है. (६)
The screaming cow goes near the calf and smells it which looks at it. To tell that this calf is mine, this cow rambhati and grows it with its milk. (6)
अथर्ववेद (कांड 9)
अ॒यं स शि॑ङ्क्ते॒ येन॒ गौर॒भीवृ॑ता॒ मिमा॑ति मा॒युं ध्व॒सना॒वधि॑ श्रि॒ता । सा चि॒त्तिभि॒र्नि हि च॒कार॒ मर्त्या॑न्वि॒द्युद्भव॑न्ती॒ प्रति॑ व॒व्रिमौ॑हत ॥ (७)
गरजते हुए मेघ ने वाणी को ढक लिया है. मेघ द्वारा ढकी हुई वाणी शब्द करती है. यही वाणी मेघों से बिजली के रूप में प्रकट हो कर मनुष्यों को भयभीत करती है. (७)
The thundering cloud has covered the speech. The voice covered by the cloud does the word. This speech appears in the form of electricity from the clouds and frightens humans. (7)
अथर्ववेद (कांड 9)
अ॒नच्छ॑ये तु॒रगा॑तु जी॒वमेज॑द्ध्रु॒वं मध्य॒ आ प॒स्त्यानाम् । जी॒वो मृ॒तस्य॑ चरति स्व॒धाभि॒रम॑र्त्यो॒ मर्त्ये॑ना॒ सयो॑निः ॥ (८)
यमलोक की पीड़ाओं के भय से कांपते हुए प्राणी के हृदय में जीव सांस लेता है. मरणशील जीव अन्य मरणधर्मा प्राणियों का सयोनि अर्थात् समान शरीर वाला है एवं स्वधा का भक्षण करता है. (८)
The creature breathes in the heart of the creature trembling with the fear of the sufferings of Yamlok. The dying creature is the sayoni of other dead creatures i.e. with the same body and eats swadha. (8)