हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.15.7

कांड 9 → सूक्त 15 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
अ॒यं स शि॑ङ्क्ते॒ येन॒ गौर॒भीवृ॑ता॒ मिमा॑ति मा॒युं ध्व॒सना॒वधि॑ श्रि॒ता । सा चि॒त्तिभि॒र्नि हि च॒कार॒ मर्त्या॑न्वि॒द्युद्भव॑न्ती॒ प्रति॑ व॒व्रिमौ॑हत ॥ (७)
गरजते हुए मेघ ने वाणी को ढक लिया है. मेघ द्वारा ढकी हुई वाणी शब्द करती है. यही वाणी मेघों से बिजली के रूप में प्रकट हो कर मनुष्यों को भयभीत करती है. (७)
The thundering cloud has covered the speech. The voice covered by the cloud does the word. This speech appears in the form of electricity from the clouds and frightens humans. (7)